कभी कोई एक गांव था मेरा
जहां सूर्योदय के पहले ही
मां जाग जाती थी
खाना बनाने
और बाबूजी
गाय भैंसो को चारा देने
और तड़के ही
निकल जाते थे सब लोग
मजदूरी करने
सत्तू, चना, चबेना की पोटली लेके
और हम बच्चे करते थे देखभाल
अपने छोटे भाई बहनों की
घर और आंगन की
भेड़, बकरी, सूअर, मुर्गे, गाय, भैंसो की
खेलते भी थे इनके साथ
और तैयार करते थे अपने आप को
खेतों में काम करने के लिए
कैसे भी कमाने के लिए
यही होता था हमारा बचपन
पर बहुत खुश रहते थे इसी में
दो गज ही सही
एक आशियाना होता था
जिसे अपना कह सकते थे
- ByNiraj Kumar
- October 12, 2024






